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प्रधान सम्पादक- करण समस्तीपुरी, सम्पादक- जन्मेजय, सँयोजक- कुन्दन कुमार मल्लिक,

Saturday, 16 May 2009

इस कदर आशिकी की इंतेहाँ ना लीजिए।।

दोस्तों, हाजिर हूँ मैं एक बार फिर आप सब के सामने ले कर एक नया तराना ! उम्मीद करता हूँ कि "कर्ण-कायस्थ चिट्ठी" की ये पेशकश आप सब को बेहद पसन्द आएगी। और हाँ, हमें अपनी टिप्पणी से अवगत कराना ना भूलें,क्योंकि आपकी टिप्पणियाँ ही हमारे लिए प्रोत्साहन एवम प्रेरणा का श्रोत हैं। तो लीजिए पेश करता हूँ अपनी ये रचना...


इस कदर आशिकी की इंतेहाँ ना लीजिए।।


इस कदर आशिकी की इंतेहाँ ना लीजिए,
प्यार भरा खत है, ऐसे चीथडे ना कीजिए,
लब्ज़ कोई स्याही नहीं, खून से लिखे हैं मेरे,
खत नहीं,ये दिल मेरा है,टुकडे ना कीजिए,
यूँ सितम ना कीजिए।
इस कदर आशिकी की इंतेहाँ ना लीजिए।।


नूर है जो हूर-सा तो यूँ गुमाँ ना कीजिए,
इस कदर आशिकों की बेजती ना कीजिए,
माँगते हैं दिल दिल दे करके,खैरात नहीं माँगते,
एक हाथ दीजिए,एक हाथ लीजिए;
यूँ सितम ना कीजिए।
इस कदर आशिकी की इंतेहाँ ना लीजिए।।


हम बने हैं आपके ही,आप हैं हमारे लिए,
ये खुदा का फैसला,यूँ नाकबूली ना कीजिए,
ना मिलेगा हम-सा कोई प्यार करने वाला तुम्हें,
दिल क्या है,जाँ भी दे दें,आजमा तो लीजिए;
यूँ सितम ना कीजिए।
इस कदर आशिकी की इंतेहाँ ना लीजिए।।
इस कदर आशिकी की इंतेहाँ ना लीजिए।।

-जन्मेजय

4 comments:

ANANT said...

Bahut khoob Janmejay Bhai... Parantu jab ishq kiya hi hai to Aashiqi ke intehaan se mat bhagiye... Sitam to sehna hi padta hai !!
Aapki yeh rachna mann mein ek saath kai sawal jaga gayi...bahut hi marm-asparshi bhaavon ko bikher diya hai aapne !!

Likhte rahiye...!!

Dhanyavaad avam Pyaar !!!!

sanjana said...

hmmm.....

well i feel something is missing in the poetry/lyrics...!!!

thts my personal view janmejay ji!!

kya missing hai yeh baki gyani log bata sakte hain...but whn i read it feel kuch missing hai...!!

but thn again its gud...!!!

gud wishes...!!

hope to have more from you soon!!

sanjana

PRAKASH said...

bahut badhiya. uttam...
ab ishk kiya hai to imtehaan to dene hi honge. ishk ka raaasta to one way traffic hai. sirf chalte jaana hai. waapsi ka koi raasta nahi. so keep on going

sandy said...

नूर है जो हूर-सा तो यूँ गुमाँ ना कीजिए,
इस कदर आशिकों की बेजती ना कीजिए,
माँगते हैं दिल दिल दे करके,खैरात नहीं माँगते,
एक हाथ दीजिए,एक हाथ लीजिए;
यूँ सितम ना कीजिए।
इस कदर आशिकी की इंतेहाँ ना लीजिए।


the best line you hv made for....
sandy.....

 

कर्ण कायस्थ चिठ्ठी