ब्लॉग प्रबन्ध मण्डली :-

प्रधान सम्पादक- करण समस्तीपुरी, सम्पादक- जन्मेजय, सँयोजक- कुन्दन कुमार मल्लिक,

Tuesday, 9 June 2009

मन का पंछी उड़ना चाहे….


मन का पंछी उड़ना चाहे,
लेकिन उड़ ना पाये !
हाय !
किसको दर्द सुनाये !!
कतरे गए पंख कोमल और
आँखे हैं धुंधलाई !
धुंधली आंखो में सतरंगी,
सपने बहुत छुपाये !!
हाय !
किसको दर्द सुनाये !!
कहाँ बसेरा, कहाँ ठिकाना,
किस पथ से किस नभ को जाना !!
काल जाल लेकर बैठा है,
भय से जी घबराए !
हाय !
किसको दर्द सुनाये !!

- करण समस्तीपुरी

4 comments:

sanjana said...

awesome...karan ji!!

believe me your thoughts are really different and cool..!!!

I liked thm..infact i loved all the poetry i read on this blog...!!!


my fav line in this one is..
"धुंधली आंखो में सतरंगी,
सपने बहुत छुपाये !!""

aap bahut hi accha likhte hain..!!!;)

sanjana

sweet wishes..!!!!!

सलाम ज़िन्दगी said...

बहुत खूब लिखा है जनाब दिल खुश कर दिया.....सुधी सिद्धार्थ।

Harkirat Haqeer said...

किसको दर्द सुनाये !!
कहाँ बसेरा, कहाँ ठिकाना,
किस पथ से किस नभ को जाना !!
काल जाल लेकर बैठा है,
भय से जी घबराए !
हाय !
किसको दर्द सुनाये !!


करण जी सुंदर भाव अभिव्यक्ति ....पर एक शिकायत .....आपके इतने सारे ब्लॉग हैं की समझ नहीं आता कौन सा गतिमान है ....अनुरोध है एक ही ब्लॉग रखें .....!!

Apanatva said...

blogs kee soochee me vykti ulajh kar rah jata hai......
by chance hee yanha pahuchee aur ek sunder bhavo kee abhivyakti padane ko milee..........

 

कर्ण कायस्थ चिठ्ठी